16 अक्टूबर 2018 को सुबह-सुबह फोन की घंटी बजने
के साथ मेरी नींद खुली, फोन उठाया तो मेरे गाँव का दोस्त था, उसने जल्दी मिलने
को बोला, मै तैयार होकर 10-15 मिनट में उससे मिला, तो उसने सीधे शब्दो
में कहा कि “घूमने चलोगे ?, मैंने आश्चर्य से कहा “कहाँ?” कही भी! उसने
उत्तर दिया और पूछा तुम बताओ? मेरे दिमाग में अचानक घोडा कटोरा झील राजगीर
का विचार आया। वह भी तैयार हो गया। जल्द ही हम दो से छ: दोस्त घोडा कटोरा के लिए
निकल गए। रास्ते में राजगीर में नए बने स्विमिंग पुल में नहाने का कार्यक्रम बन
गया। हमलोग गिरियक होते हुए राजगीर पहुँच गए।
राजगीर वैसे तो अपने गर्म जल के कुण्ड के लिए प्रसिद्ध है, और यह प्राचीन महाजनपद
मगध कि राजधानी रही थी, यह महाभारत काल के जरासंघ का राज्य
भी था तथा यहाँ भीम-जरासंघ के मध्य }an युद्ध भी हुआ था। यह स्थान हिन्दू, बौद्ध, जैन धर्म के लोगो के लिए
प्रसिद्ध है। यहाँ प्रत्येक वर्ष राजगीर महोत्सव का आयोजन किया जाता है। वर्तमान
में बौद्ध अनुयाईओं के लिए विश्व प्रसिद्ध शांति स्तूप बेहद आकषर्क है।
इन सबसे
अलग अपना तो मन बिहार सरकार द्वारा नए बनवाए गए शीतल जल के स्विमिंग पूल में नहाने
का था। अत: हमलोग बिना एक पल की देरी किए हुए स्विमिंग पूल के पास पहुँच गए और
टिकट खरीदकर पूल में एन्ट्री ले ली। पूल की बनावट आधुनिक होटलों के स्विमिंग पूल
के स्थान पर प्राचीन काल के स्नान कुंड के डिजाइन में बनाया गया है, जो
राजसी ठाट का एहसास दिलाता है। हम लोग बिना किसी देरी के नहाने में मशगूल हो गए।
अधिक देर तक मस्ती करने के लिए हमने प्लास्टिक का बॉल मँगवा लिया और फिर पानी में
फूटबॉल की जगह हैंडबॉल शुरू हो गया ।
दो घंटे मस्ती करने के बाद जब हम स्विमिंग
पूल से निकले तो अचानक मेरे दाहिने पैर के पंजे में जलन हो रहा था और खून भी बह
रहा था। वस्तुत: स्विमिंग मूल में एक छोटा सा गड्डा था जिसमे मेरा पैर चला गया और
चोटिल हो गया था, उस समय पानी में दर्द तो हुआ लेकिन मैं खेलने की मस्ती में भूल गया
था, अब
मैंने जल्दी से कपड़े पहने और अपने भाई के साथ बाईक से राजगीर सदर अस्पताल पहुँच
गया। पट्टी कराने के वाद हमलोग घोडा-कटोरा झील की और बढ़ गए।
घोडा
कटोरा झील पहाड़ियों के बीच स्थित है। यहाँ पहुँचने के लिए राजगीर से अपनी गाड़ी या
टमटम से गिद्धकूट पर्वत ओर स्थित शांति स्तूप के बेसमेंट तक जाया जाता है और वहाँ
से टमटम द्वारा झील तक पहुँचना होता है, केवल घोडा गाड़ी (टमटम) से अथवा पैदल (track) जाया जा
सकता है।
हमलोग अपनी गाड़ी को पार्क कर घोडा गाड़ी में सवार
हो गए। अब हमलोग अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे थे दोनों तरफ पहाड़ियों ओर घने जंगल ओर उस
पर घोडा गाड़ी की सवारी सोने पे सुहागा लग रहा था। लगभग 3-4 किलोमीटर का सफर बेहद
रोमांचक, सुंदर और भाव विभोर करने वाला था। लग रहा था कि हमलोग किसी
और दुनिया की सैर कर रहे है। लगभग एक घंटे में हमलोग झील के पास पहुँच गए।
घोडा कटोरा झील पहाड़ियों से घिरा हुआ है
तथा यह मीठे पानी का है यहाँ अनेक प्रकार के पक्षी, जलीय जीव आसानी से देखे जा सकते है। झील
के बीच महात्मा बुद्ध कि विशाल प्रतिमा लगाई गई है जो बेहद आकषर्क
है। यहां बोटिंग सुविधा भी है। हमलोग टिकट लेकर बोट में सवार हो गए। बोट में
हमलोगों ने पूरे झील का चक्कर लगाया। यह इतना रोमांचक था कि मैं अपना दर्द भूल
चुका था और लगातार बोट का पैंडल जख्मी पैर से चला रहा था। जैसे-जैसे सूरज ढाल रहा
था झील कि सुंदरता बढ़ती जा रही थी, हम झील से बाहर निकलने को तैयार नहीं थे
लेकिन बोट वाले के बार-बार बुलाने पर भारी मन से हमने अपनी नैया को किनारे लगा ही
दिया। वापसी में फिर घोडा गाड़ी का सफर, रोमांचक होने लगा। जैसे-जैसे शाम ढाल रही
थी यात्रा का रोमांच बढ़ता जा रहा था। अंतत: हमलोग पार्किंग स्थान पर पहुँच गए और
घोडा कटोरा झील पुन: आने के वादे के साथ अपने घर को चल दिए।
सामान्य जानकारी
घोडा कटोरा झील:- यह राजगीर की पहाड़ियो के बीच
मानव गतिविधियो से अछूता मीठे पानी का झील है। उसके बीच में महात्मा बुद्ध की बड़ी मूर्ति लगी हुई है।
कैसे पहुंचे:-
पटना से बस, ट्रेन तथा अपनी
गाड़ी से राजगीर पहुंचा जा सकता है।
आस-पास:-
राजगीर में गरम जल कुण्ड, शांति स्तूप, स्वर्ण भंडार, तपोवन आदि दर्शनीय
स्थल है। यहां से 8 Km की दूरी पर प्रसिद्ध नालंदा महाबिहार का
पुरास्थल तथा लगभग 15 Km की दूरी पर जैन तीर्थकर महावीर स्वामी का
निर्वाण स्थल पावापुरी स्थित है। यहा से बोधगया, गया, कुंभरार भी जाया जा
सकता है।
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